All India Kisan Sabha (Ajoy Bhavan)

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All India Kisan Sabha is the peasant or farmers' wing of the Communist Party of India. The Kisan Sabha movement started in Bihar under the leadership of Swami Sahajanand Saraswati, who had formed in 1929 the Bihar Provincial Kisan Sabha (BPKS) to mobilise peasant grievances against the zamindari attacks on their occupancy rights.[1]

Gradually the peasant movement intensified and spread across the rest of India. All these radical developments on the peasant front culminated in the formation of the All India Kisan Sabha (AIKS) at the Lucknow session of the Indian National Congress in April 1936, with Swami Sahajanand Saraswati elected as its first president.[2] The other prominent members of this Sabha were N.G. Ranga, Ram Manohar Lohia, Jayaprakash Narayan, Acharya Narendra Dev and Bankim Mukerji, and it involved prominent leaders like N.G. Ranga, E.M.S. Namboodiripad, Pandit Karyanand Sharma, Pandit Yamuna Karjee, Pandit Yadunandan (Jadunandan) Sharma, Rahul Sankrityayan, P. Sundarayya, Ram Manohar Lohia, Yogendra Sharma and Bankim Mukerji. The Kisan Manifesto, released in August 1936, demanded abolition of the zamindari system and cancellation of rural debts; in October 1937 it adopted the red flag as its banner.[3] Soon, its leaders became increasingly distant with Congress and repeatedly came in confrontation with Congress governments, in Bihar and United Province.

In the subsequent years, the movement was increasingly dominated by Socialists and Communists as it moved away from the Congress. By the 1938 Haripura session of the Congress, under the presidency of Netaji Subhas Chandra Bose, the rift became evident[3] and, by May 1942, the Communist Party of India, which was finally legalized by the government in July 1942,[4] had taken over AIKS all across India, including Bengal where its membership grew considerably.[5] It took on the Communist Party's line of People's War and stayed away from the Quit India Movement which started in August 1942, though this also meant losing its popular base. Many of its members defied party orders and joined the movement. Prominent members like N.G. Ranga, Indulal Yagnik and Swami Sahajananda soon left the organization, which increasingly found it difficult to approach the peasants without the watered-down approach of pro-British and pro-war, and increasing its pro-nationalist agenda, much to the dismay of the British Raj which always though Communists would help them in countering the nationalist movement.[6]

The Communist Party of India (CPI) split into two in 1964; following this, so did the All India Kisan Sabha, which each faction affiliated to the splinters.

References[edit]

  1. ^ Bandyopādhyāya, Śekhara (2004). From Plassey to Partition: A History of Modern India. Orient Longman. pp. 523 (at p 406). ISBN 978-81-250-2596-2. 
  2. ^ Bandyopādhyāya, Śekhara (2004). From Plassey to Partition: A History of Modern India. Orient Longman. pp. 523 (at p 407). ISBN 978-81-250-2596-2. 
  3. ^ a b Mahatma Gandhi, by Sankar Ghose. Published by Allied Publishers, 1991. ISBN 81-7023-205-8. Page 262.
  4. ^ Caste, Protest and Identity in Colonial India: The Namasudras of Bengal, 1872-1947, by Shekhar Bandyopadhyaya. Routledge, 1997. ISBN 0-7007-0626-7. Page 233.
  5. ^ States, Parties, and Social Movements, by Jack A. Goldstone. Cambridge University Press, 2003. ISBN 0-521-01699-1. Page 192.
  6. ^ Peasants in India's Non-violent Revolution: Practice and Theory, by Mridula Mukherjee. Published by SAGE, 2004. ISBN 0-7619-9686-9. Page 347.

1 अखिल भारतीय किसान सभा का संविधान

किसान सभा प्रकाशन 4 विन्डसर प्लेस नई दिल्ली 2 अखिल भारतीय किसान सभा के 24वें राष्ट्रीय अधिवेशन जो मधुबनी में (16 जून से 19 जून 1993) आयोजित हुआ उसमें अ.भा.कि.स के संविधान में संशोधन की प्रक्रिया के लिए पाँच सदस्यों की उपसमिति बनाई गई ताकि अ.भा.कि.स द्वारा आवश्यक परिवर्तनों को अन्तिम रूप देने की सिफारिश की जाए। 21-22 जून को देहली में और 16 अक्तूबर 1994 को दोबारा हैदराबाद में सी.के.स और अ.भा.कि.स की अपनी सभाओं में उपसमिति की सिफारिशों को मद्देनज़र रखने के पश्चात संविधान मे अन्तिम संशोधन किए गए। अ.भा.कि.स के लक्ष्यों और कार्यों को मौजूदा बदली हुई और बदलती हुई परिस्थितियों को संज्ञान में लेते हुए सम्पूर्ण रूप से समन्वित किया गया। आजन्म सदस्यता के लिए एक विधान को भी शामिल किया गया। न्यूनतम सदस्यता शुल्क को एक रूपए से दो रूपए प्रति वर्ष किया गया। अ.भा.कि.स के परिवर्तनों को राष्ट्रीय परिषद और केन्द्रीय किसान कमेटी को भी केन्द्रीय कार्यकारिणी में परिवर्तित कर दिया गया। दूसरे कुछ निम्न परिवर्तन भी किए गए। अखिल भारतीय किसान सभा के संशोधनों और संशोधित संविधान को सर्वसम्मति से अखिल भारतीय किसान परिषद ने स्वीकार कर लिया। यह अखिल भारतीय किसान सभा का नया संशोधित संविधान है। 3 अखिल भारतीय किसान सभा का संविधान हैदराबाद में अखिल भारतीय किसान परिषद द्वारा संशोधित अनुच्छेद 1- नाम संगठन का नाम अखिल भारतीय किसान सभा होगा। भारतीय किसान सभा भूमि के स्वामी किसानों, भूमिहीन किसानों जो भूमि पर खेती करते हैं, बटाईदारों, भाडे पर खेती करने वाले आदि किसानों का जन संगठन है। अनुच्छेद 2- उद्देश्य और लक्ष्य अखिल भारतीय किसान सभा के उद्देश्य और लक्ष्य निम्न होंगे। 1. सभी प्रकार की भूमि की जागीरदारी को समाप्त करना और भूमि सुधारों को पूरा करने के साथ पुराने कर्जों को खत्म करना , भूमि का बंदोबस्त करना और छोटे व मंझले किसानों को लाभांवित करने के अनुरूप बनाना। 2. सामाजिक न्याय और छुआछुत को समाप्त करके समानता सुनिश्चित करना और दूसरे सामाजिक उत्पीडन और अत्याचार को तथा किसानों के आर्थिक शोषण को समाप्त करना। 3. कृषि में उत्पादन को संगठित करना तथा बढ़ाना और कृषि में उत्पादकता को बढ़ाना, सहयोगी घटकों और दूसरे रोजगार उत्पादक उद्यमों, कृषि उद्योगों बगैरा को विकसित करने के लिए पर्याप्त स्त्रोत व साधनों को प्रदान करना तथा राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता को प्राप्त करने के लिए अनुसंधानों और विकास ठीक तकनीक को प्राप्त करना। 4. समग्र मूल्य निति को निर्धारित करने के लिए प्राथमिक उत्पादकों के मूल्यों को सुनिश्चित करना, कृषि उत्पाद और औद्योगिक वस्तुओं के मूल्यों के मध्य संतुलन बनाना, प्राथमिक उत्पादकों को दिए जाने वाले अन्नादि के मूल्यों को और वास्तविक उपभोक्ताओं से तमाम जरूरी वस्तुओं के वितरण के मध्य अंतर को सीमित करना और कृषि उत्पादन को मान्य मूल्यों पर जन वितरण प्रणाली द्वारा निश्चित करना। 5. पंचायती राज व सहकारी संस्थाओं इत्यादि को मजबूत करते हुए भ्रष्टाचार तथा हमारे राष्ट्रीय जीवन में से तमाम उपनिवेशी व अर्ध सामन्ती प्रभावों को समाप्त करना और ग्रामीण जीवन में सांस्कृतिक पर्यावरण, जनशिक्षा इत्यादि के बहुमुखी विकास और जनवादी को आगे ज्यादा मजबूत करना। 6. बहुराष्ट्रीय और नवउपनिवेशी शक्तियों के तंत्र को तथा देश के अंदर विध्वंसकारी साम्प्रदायिक, जातिवादी शक्तियों को पराजित करते हुए राष्ट्रीय प्रभुसता, एकता, अखंडता और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता की रक्षा करना। अनुच्छेद 3- झंडा अखिल भारतीय किसान सभा का झंडा लाल रंग का होगा जिसके मध्य में किसान सभा स्थानिय भाषा में अंकित होगा। अनुच्छेद 4- किसान सभा का अखिल भारतीय स्वरूप अखिल भारतीय किसान सभा का स्वरूप अधोलिखित के अनुसार होगाः 1. पंचायत स्तर पर प्राथमिक किसान सभा के रूप में 2. आंचल, ब्लाक, तालुका या तहसील स्तर पर किसान सभा की कमेटियां 3. जिला स्तर पर किसान सभा की कमेटियां 4. राज्यस्तरीय किसान सभा की परिषदें जो राज्य स्तर के दूसरे किसान संगठनों से सम्बद्ध होंगी। 5. राष्ट्रीय परिषद और केन्द्रीय कार्यकारिणी 6. अखिल भारतीय किसान सभा का अखिल भारतीय प्रतिनिधि सम्मेलन अनुच्छेद 5- सदस्यता अ. 16 वर्ष का कोई भी किसान पुरूष महिला जिसे अखिल भारतीय किसान सभा के लक्ष्य व कार्यक्रम स्वीकार हों और किसान सभा के अनुशासन को मानने के लिए इच्छुक हो वह वार्षिक सदस्यता शुल्क जो किसी भी सूरत में दो रूपये से कम नहीं होगा, देकर किसान सभा का सदस्य होगा। आ. कोई भी व्यक्ति एक बार ही 100 रूपये देकर आजीवन सदस्य के रूप में नामांकित हो सकता है और एक किसान सभा के सदस्य के रूप में वह अधिकार व उतरदायित्व संपन्न हो जाएगा। इ. कोई भी किसान कमेटी किसी दूसरे व्यक्ति को जो किसान सभा के संगठन में काम करना चाहता है और अनुच्छेद 5 अ के अनुसार इसकी सदस्यता ग्रहण कर सकता है, उसे शामिल कर सकती है। ई. सदस्य की सदस्यता का काल उस वर्ष की पहली फरवरी से 31 जनवरी तक का होगा और प्रतिवर्ष उसकी सदस्यता का नवीनकरण होगा। उ. एक स्थान से ज्यादा किसी भी स्थान पर कोई भी सदस्यता नहीं लेगा और सभी सदस्य प्राथमिक किसान सभा कमेटी में संगठित होंगे। ऊ. 31 जनवरी तक जो सदस्यता लेने की अन्तिम तिथि है कोई भी सदस्य जिसने वार्षिक सदस्यता नहीं ली है किसान सभा के किसी भी चुनाव में भाग नहीं लेगा या किसान सभा या उसकी किसी ईकाई में चुनाव द्वारा चुने गए किसी भी पद पर उसे नहीं लिया जाएगा। अनुच्छेद 6- जब किसी राज्य में किसान संगठन जहां राज्य में अखिल भारतीय किसान सभा से सम्बद्ध कोई किसान सभा न हो, अखिल भारतीय किसान सभा से सम्बद्ध होना चाहता हो, निम्न शर्तों पर उसे सम्बद्धता दे दी जाएः 1. सम्बद्धता का प्रार्थना पत्र केन्द्रीय कार्यालय में तमाम दस्तावेजों के साथ यह प्रमाणित करते हुए कि संगठन के एक अंग के रूप में वह अ.भा.कि.स के उद्देश्यों व क्रार्यक्रमों, अनुशासन व संगठन के प्रति निष्ठावान रहेगा, पहुंच जाना चाहिए। 2. केन्द्रीय कार्यकारिणी द्वारा ऐसे प्रार्थनापत्र को स्वीकार करने पर प्रार्थी संगठन को अखिल भारतीय किसान सभा के सदस्यता शुल्क की राशि अदा करनी होगी। 3. वर्ष में किसी भी समय सम्बद्धता दी जा सकती है। 4. केन्द्रीय कार्यकारिणी द्वारा सम्बद्धता के लिए कोई प्रार्थना पत्र अस्वीकृत होता है तो इस निर्णय के विरूद्ध अपील राष्ट्रीय परिषद के पास रहेगी। 5. केन्द्रीय कार्यकारिणी द्वारा या राज्य किसान कमेटियों द्वारा किसानों के अलग विशेष संगठनों को जो अपनी विशेष मांगों और समस्याओं के आधार पर बनाते हैं उन्हे सामुहिक सम्बद्धता दी जा सकती है। केन्द्रीय कार्यकारिणी या राज्य किसान कमेटियां भी किसान सभा की सदस्य होंगी जो इन सम्बद्धित संगठनों को अखिल भारतीय या राज्य स्तर पर किसान सभा के विभिन्न चुने हुए घटकों को किन शर्तों और परिस्थितियों पर प्रतिनिधित्व देने का निर्णय लेंगी। अनुच्छेद 7- प्रतिनिधित्व 1. अ. प्रत्येक राज्य किसान सभा अखिल भारतीय किसान सभा के प्रतिनिधि सत्र में राज्य के प्राथमिक सदस्यों के 1000 की संख्या पर एक प्रतिनिधि द्वारा प्रतिनिधित्व करेगा। आ. अ.भा.कि.सभा सत्र में प्रतिनिधि प्रत्येक राज्य के किसान सभा के संविधान में प्रदत राज्य के किसान सम्मेलन के प्रतिनिधियों द्वारा निर्वाचित होंगे। प्रत्येक प्राथमिक सदस्य और आजीवन सदस्य ए आई के एस के सत्र के लिए निर्वाचित हो सकते हैं और ए आई के एस के न्यूनतम 25 रूपये प्रतिनिधि शुल्क दिए बिना कोई प्रतिनिधि अपने अधिकार का प्रयोग नहीं कर पाएगा। इ. अ.भा.कि.सभा से सम्बद्ध प्रत्येक राज्य किसान सभा साधारणतया प्रत्येक वर्ष नियमित सदस्यता के आधार पर सम्मेलन करेगी। ई. जिस वर्ष सत्र होना है उस वर्ष की 31 जनवरी को खत्म होते वर्ष के दौरान भर्ती की गई सदस्यता के आधार पर अ.भा.कि.सभा के सत्र के प्रतिनिधि निर्वाचित किए जाएंगे।

  2.  अ.   राष्ट्रीय परिषद के लिए राज्य से सदस्यों की संख्या प्रत्येक 10 प्रतिनिधियों पर एक के आधार पर

सुनिश्चित की जाएगी या अ.भा.कि.सभा के प्रतिनिधि सत्र के लिए पांच से कम पर एक आंशिक के प्रतिनिधि रूप में सुनिश्चित की जाएगी। आ. प्रतिनिधियों के सत्र के लिए राज्य से अ.भा.कि.सभा के प्रतिनिधि अपने आप से राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लिए नियत संख्या के सदस्य को उस राज्य से चुनेंगे। राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य जिसे चुना गया हो जब तक वह अ.भा.कि.सभा को 10 रूपये सदस्यता शुल्क नहीं देता, वह अपने अधिकार का प्रयोग नहीं करेगा। 3. अ.भा.कि.सभा प्रतिनिधि सत्र के लिए तथा राष्ट्रीय परिषद के लिए प्रतिनिधियों का चुनाव एकल स्थानांतरित मत के आधार पर किया जाएगा। अनुच्छेद 8- अखिल भारतीय किसान सभा का प्रतिनिधि सत्रः 1. अ.भा.कि.सभा का प्रतिनिधि सम्मेलन 3 वर्ष में एक बार होगा और सम्मेलन के लिए चुने गए प्रतिनिधियों से निर्मित होगा। 2. चुने गए प्रतिनिधियों की सूची प्रतिनिधि शुल्क राज्य कमेटियों द्वारा अ.भा.कि.सभा के महासचिव को प्रतिनिधियों के चुनाव के एकदम बाद भेज देना चाहिए। 3. केन्द्रीय कार्यकारिणी को अखिल भारतीय सम्मेलन की तारीख व स्थान का तथा प्रतिनिधियों और राज्य परिषद के सदस्यों के चुनाव की अन्तिम तारीख का चयन करना होगा। 4. राष्ट्रीय कार्यकारिणी अखिल भारतीय सम्मेलन और आवश्यक दस्तावेज तैयार करने से पहले बैठक करेगी। 5. अखिल भारतीय प्रतिनिधि सम्मेलन की सारी कार्यवाहियां जैसे चर्चा, महामंत्री की रिपोर्ट पर निर्णय, आडिटिड एकाउन्टस, अनुमानित बजट और प्रस्तावों को अध्यक्ष की रहनुमाई में प्रतिनिधियों को करने का अधिकार होगा। प्रतिनिधियों को प्रत्येक संवैधानिक अधिकार के तहत प्रस्तावों पर बहस करने, स्वीकार करने, संशोधित करने, अस्वीकृत करने का अधिकार होगा। प्रधान की अध्यक्षता में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सम्मेलन में प्रतिनिधियों द्वारा की गई तमाम कारवाईयों जैसे बहस, महामंत्री की रिपोर्ट पर निर्णय, आडिटिड एकाउंटस, अनुमानित बजट और प्रस्तावों पर विचार करना होगा। 6. अखिल भारतीय प्रतिनिधि सम्मेलन के लिए राष्ट्रीय परिषद के कार्यालय में सम्मेलन से कम-से-कम 14 दिन पहले पहुँच जाना चाहिए, ऐसा न करने पर कार्यालय किसी भी नोटिस पर ध्यान नहीं देगा केवल अपवाद के रूप में अध्यक्ष की विशेष अनुमति से नोटिस पर ध्यान दिया जाएगा। 7. आपातकाल की स्थिति में जिसके कारण अखिल भारतीय प्रतिनिधि सम्मेलन न हो सके, राष्ट्रीय परिषद बैठक करेगी और आपात स्थिति रे गरम्यान सभी कार्यों को पूरा करेगी जिसे आम तौर पर अखिल भारतीय सम्मेलन करता है। 8. केन्द्रीय कार्यकारिणी कमेटी अपना कोई प्रस्ताव रख सकती है और प्रतिनिधियों की एक तिहाई संख्या द्वारा इसे अखिल भारतीय प्रतिनिधि सम्मेलन के लिए किसी खास उद्देश्य के लिए विशेष अखिल भारतीय प्रतिनिध सम्मेलन बुलाया गया हो, इसे प्रतिपादित करेगी। 9. अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष विशेष अधिवेशन की अध्यक्षता करेंगे और कार्रवाई के लिए निर्वाचित प्रतिनिधि अखिल भारतीय प्रतिनिधि सम्मेलन में वे विशेष अधिवेशन में भी प्रतिनिधी के रूप में भी कार्य करेंगे। 10. इसी प्रकार का कार्य नियमित अधिवेशन की तरह ही विशेष अधिवेशन में किया जाएगा। अगले अखिल भारतीय अधिवेशन तक किसान सभा की तमाम अधिनस्थ ईकाईयों के प्रतिनिधि द्वारा लिए गए प्रस्ताव व निर्णय मान्य होंगे। 11. अखिल भारतीय प्रतिनिधि सम्मेलन की अखिल भारतीय स्वागती कमेटी अपनी बजत का 10 प्रतिशत अ.भा.कि.सभा के कार्याल को देंगे और बचत का बचा हुआ उस सम्बद्ध राज्य की किसान सभा को दिया जाएगा। अनुच्छेद 9- अखिल भारतीय प्रतिनिधी सत्र में आने वाले प्रश्नों का फैसला साधारण बहुमत वोट के आधार पर होगा लेकिन राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय राजनिति से जुडे प्रश्नों का फैसला दो तिहाई बहुमत से होगा। अनुच्छेद 10- राष्ट्रीय परिषदः 1. राष्ट्रीय परिषद दो अखिल भारतीय अधिवेशन के मध्य सभी शक्तियों का इस्तेमाल करने वाला सर्वोच्च निकाय होगा। 2. राष्ट्रीय परिषद में कोई पद दो अखिल भारतीय प्रतिनिधी अधिवेशन के दरम्यान खाली हो जाता है तो रिक्त स्थान को राष्ट्रीय परिषद चयन द्वारा भरेगी जिस राज्य से वह पद खाली हुआ है। 3. साधारणतया राष्ट्रीय परिषद कम से कम दो बार बैठकें करेगी। विशेष बैठक किसी विशेष मकसद से कम से कम 20 प्रतिशत राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों द्वारा हो सकती है। यदि महामंत्री राष्ट्रीय परिषद की बैठक बुलाने से इन्कार करता है उसके बाद भी इसकी जरूरत हो तब जरूरतमंदों को स्वयं बैठक बुलाने का अधिकार होगा और जरूरी कार्य संपन्न किया जाएगा। जरूरी बैठक का दूसरे मामलों को भी जिसे महामंत्री को सूचना देकर बताया गया हो शामिल किया जा सकता है। राष्ट्रीय परिषद की बैठक बुलाने के लिए कम से कम 15 दिनों का नोटिस प्रत्येक सदस्य को अलग-2 भेजना जरूरी होगा। बैठक की सूचना महामंत्री द्वारा भेजी जाएगी। आपातकाल बैठक 10 दिन की सूचना पर बुलाई जा सकती है। 4. राष्ट्रीय परिषद की पहली बैठक अखिल भारतीय प्रतिनिधी अधिवेशन के दौरान या तुरंत बाद की जाएगी जब ये अपने कार्यालय पदाधिकारियों का चुनाव करेगी- वे कौन हैं- अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री, सहसचिव और एक कोषाध्यक्ष, ये अखिल भारतीय प्रतिनिधियों के बीच में से होंगे। इस प्रकार चुने गए पदाधिकारियों को ए आई के एस के सदस्य माना जाएगा। 5. ए आइ के एस की कार्यविधि इसकी पहली बैठक से लेकर तब तक खत्म नहीं होगी जब तक राष्ट्रीय परिषद के नए निर्वाचित सदस्य बैठक नहीं करते। 6. राष्ट्रीय परिषद का कोरम 25 प्रतिशत सदस्यों द्वारा निर्मित होगा। अनुच्छेद 11- केन्द्रीय कार्यकारिणी कमेटी (सी इ) 1. केन्द्रीय कार्यकारिणी कमेटी अखिल भारतीय किसान परिषद का कार्यकारी अंग होता है जो परिषद की नीति व कार्यक्रम को अमल में लाने के लिए शक्ति सम्पन्न होता है जो नियम बनाता है और संविधान की विवेचना करता है और ए आइ के एस के तमाम मामलों जो व्याख्यातित या वर्णित नहीं हुए हैं। ये अपने कार्यकलाप के लिए राष्ट्रीय परिषद के लिए उत्तरदायी होंगे। 2. पदाधिकारियों समेत केन्द्रीय कार्यकारिणी कमेटी के तमाम सदस्य अखिल भारतीय किसान परिषद द्वारा निर्धारित होंगे जो उनका निर्वाचन करेंगे। 3. मौजूदा केन्द्रीय कार्यकारिणी तब तक कार्य को जारी रखेगी जब तक नई केन्द्रीय कार्यकारिणी का निर्वाचन नहीं हो जाता। 4. किसी पदाधिकारी या राष्ट्रीय कार्यकारिणी का इस्तीफा महामंत्री द्वारा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पास पहुंचेगा जो उस मामले पर अपना निर्णय लेगी। 5. कोई कार्यकारिणी कमेटी का राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य जो निरन्तर 3 बैठकों में अनुपस्थित रहता है प्रतिनिधी ईकाई का सदस्य अपने आप नहीं रहेगा जबकि सी ई या एन ई ऐसी अनुपस्थिती को तरजीह नहीं देती। 6. प्रधान के परामर्श करके महामंत्री द्वारा केन्द्रीय कार्यकारिणी की मीटिंग बुलाई जा सकती है। वह तब भी बुलाई जाएगी जब किसी खास मकसद के लिए विशेष बैठक के लिए कम से कम एक तिहाई सदस्य केन्द्रीय कार्यकारिणी को अपनी राय पेश करें। प्रधान की इजाजत से इस बैठक में काम के दूसरे विषय भी एजेण्डे में शामिल किए जा सकते हैं। सूचित करने की तारीख से 15 दिन पहले केन्द्रीय कार्यकारिणी की बैठक के लिए केन्द्रीय कार्यकारिणी के सभी सदस्यों को सूचित करना होगा। 10 दन की सूचना पर केन्द्रीय कार्यकारिणी की आपात बैठक बुलाई जा सकती है। 7. राष्ट्रीय परिषद की केन्द्रीय कार्यकारिणी के पास विशेष बैठकों के समय स्थायी आमंत्रितों को आमंत्रित करने का अधिकार होगा जिसकी संख्या उनके तमाम सदस्यों की संख्या के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। केन्द्रीय कार्यकारिणी के लिए आमन्त्रित सदस्य राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों या आमन्त्रित सदस्यों के मध्य में से होंगे। 8. एक तिहाई सदस्य केन्द्रीय कार्यकारिणी के कोरम को बनाएंगे। अनुच्छेद 12- राज्य किसान सभाएं अ. निम्नलिखित राज्य किसान सभाएं किसान सभा को अखिल भारतीय किसान सभा का निर्माण करेंगीः 1. आंध्र प्रदेश 2. आसाम 3. बिहार 4. देहली 5. गोआ 6. गुजरात 7. हरियाणा 8. हिमाचल प्रदेश 9. केरला 10. मध्य प्रदेश 11. महाराष्ट्र 12. मणीपुर 13. कर्नाटक 14. नागालैंड 15. उड़ीसा 16. पंजाब 17. राजस्थान 18. तमिलनाडू 19. त्रिपुरा 20. उतर प्रदेश 21. पश्चिमी बंगाल 22. जम्मू 23. कश्मीर 24. मेघालय 25. अरूणाचल प्रदेश 26. मिजोरम 27. अन्डेमान निकोबार राज्य किसान सभाओं का अपना संविधान और नियम होंगे जो ए आइ के एस के संविधान तथा उसके लक्ष्य और उद्देश्य से विपरीत न हों। आ. प्रत्येक किसान सभा अ.भा.कि.सभा को कुल सदस्यता शुल्क का 10वां भाग सम्बद्धता शुल्क के रूप में देंगी और ऐसे दूसरे आर्थिक अनुदान की राशि को देगी जिसे केन्द्रीय कार्यकारिणी या राष्ट्रीय परिषद तय करेगी। इ. प्रत्येक राज्य किसान सभा अखिल भारतीय किसान परिषद और केन्द्रीय किसान कमेटी के निर्देश व मार्गदर्शन के आधीन अपने राज्य में किसान सभा की कार्यवाहियों की निगरानी होंगी। अनुच्छेद 13- 1. सदस्यता के बकाए की अदायगी में कोई अनियमितता, सदस्यों की नामजदगी बगैरा, अध्यक्ष की स्वीकृति के साथ महामंत्री द्वारा कंडोन की जा सकती है सीकेसी की अगली बैठक में अंतिम स्वीकृत मिलने तक। 2. मतभेद प्रबंधनः केन्द्रीय कार्यकारिणी को ए आइ के एस की सर्वोच्च और निर्णायक शक्ति के साथ सम्बद्ध किया गया है कि वह शिकायतों के निदान और मतभेदों को दूर करे यदि कोई हो और व्यक्तिगत रूप से कोई सदस्य या किसान सभा की कोई ईकाई राज्य किसान सभा के किसी आदेश या निर्णय से मतभेद रखते हों वह सारी शिकायतों की सुनवाई करे। 3. आवश्यकतानुसार नियमों को बनाने में केन्द्रीय कार्यकारिणी को अधिकृत किया है, किसान सभा के अनुशासन को बनाए रखने के उद्देश्य से और चुनाव को ठीक तरीके से करने के लिए, मतभेदों के प्रबन्धन के लिए क्रिडेंशियल कमेटियों के तरीकों को बनाने के लिए और ए आइ के एस के संविधान या निर्णयों की धाराओं से जुड़े दूसरे विषयों के लिए नियुक्त किया गया है। अनुच्छेद 14- अनुशासन 1. अखिल भारतीय किसान सभा प्रतिनिधी सम्मेलन के निर्णय आमतौर पर इसके संवैधानिक ईकाईयों के कार्यों का मार्गदर्शन करेगी। 2. किसान सभा के संगठन की कोई ईकाई या इसके सदस्य जो जानबूझ कर लोगों की आशाओं में किसान सभा को नीचा करता है उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। 3. जिला किसान सभा कमेटी से नीचे की कोई भी ईकाई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं कर सकती। जिला किसान सभा कमेटी के विरूद्ध कोई भी अपील राज्य किसान सभा परिषद के पास होगी जिसका निर्णय अंतिम होगा। अनुशासनात्मक कार्रवाई राज्य किसान सभा परिषद द्वारा किया जा सकता है ऐसी दशा में अपील केन्द्रीय किसान सभा के पास होगी जिसका निर्णय अन्तिम होगा। अनुच्छेद 15- कार्यालय और बैठकें 1. केन्द्रीय कार्यकारिणी का एक नियमित कार्यालय होगा जिसके व्यवस्थापक महामंत्री होंगे। 2. ए आइ के एस का नियमित हिसाब किताब अखिल भारतीय प्रतिनिधी अधिवेशन में महामंत्री द्वारा पेश किया जाएगा। वार्षिक हिसाब किताब की जांच पडताल होगी और एक आडिटर या आडिटरों द्वारा इसे प्रमाणित किया जाएगा और साथ ही अखिल भारतीय प्रतिनिधी अधिवेशन में प्रस्तुत किया जाएगा। किन्ही विशेष कारणों को देखते हुए अधिवेशन बिना जांच पडताल के हिसाब किताब प्रस्तुत करने की अनुमति देता है। 3. अ.भा.कि.स के तमाम फण्ड 500 रूपये से ज्यादा होने पर अधिकृत बैंक में जमा कराने होंगे। काम के लिए बैंक खाते का संचालन कोषाध्यक्ष और महामंत्री करेंगे। अनुच्छेद 16- संविधान का परिवर्तन 1. अ.भा.कि.स अपने संविधान को अखिल भारतीय किसान अधिवेशन में परिवर्तित करने का अधिकार रखती है जिसके लिए अधिवेशन से कम से कम एक महीना पहले इसकी सूचना अ.भा.कि.स के कार्यालय में अवश्य पहुंच जानी चाहिए। 2. संविधान में परिवर्तन के लिए रिपोर्ट बनाने के लिए अ.भा.कि.स एक उप कमेटी की नियुक्ति कर सकती है जिसे कहा जाए और राष्ट्रीय परिषद को वह अधिकार दिया जाए कि वह उप समिति द्वारा अनुमोदित परिवर्तनों पर निर्णय ले। राष्ट्रीय परिषद के पास ऐसे मामले में संविधान में किसी परिवर्तन की पहल को स्वीकार करने या अस्वीकार करने का अधिकार होगा।