Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University

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Gorakhpur University
गोरखपुर विश्वविद्यालय
GorakhpuruniversityImage2005.jpg
Motto आ नो भद्राः क्र्तवो यन्तु विश्वतः । Aa no Bhadrah Kritvo Yantu Vishvatah
Established 1957
Type Public
Chancellor B.L Joshi
Vice-Chancellor Prof. Ashok Kumar
Location Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
Campus Rural
Affiliations UGC, National Assessment and Accreditation Council
Website www.ddugu.edu.in

Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University (Hindi: दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय) or simply Gorakhpur University (Hindi: गोरखपुर विश्वविद्यालय) is located in Gorakhpur, Uttar Pradesh.

History[edit]

The University of Gorakhpur is a teaching and residential-cum-affiliating University. It is situated at a distance of about 2 kilometers form the downtown to the east and almost walking distance from railway station to the south. Although the idea of residential University at Gorakhpur was first mooted by Dr. C.J. Chako, the then Principal of St. Andrews College, then under Agra University, who initiated post-graduate and undergraduate science teaching in his college, the idea got crystallized and took concrete shape by the untiring efforts of Late Pt. S.N.M. Tripathi. The proposal was accepted in principle by the first Chief Minister of U.P., Late Pt. Govind Ballabh Pant, but it was only in 1956 that the University came into existence by an act passed by the U.P. Legislature. It actually started functioning since September 1, 1957, when the faculties of Arts, Commerce, Law and Education were started. In the following year, 1958, the faculty of science came into being. Faculties of Engineering, Medicine and Agriculture came into existence in later years. Late Mahant Digvijay Nath also made valuable contribution in the formation of the University. The Madan Mohan Malviya Engineering College.The University of Gorakhpur is a teaching and residential-cum-affiliating University. It is situated at a distance of about 2 kilometers form the downtown to the east and almost walking distance from railway station to the south.The idea got crystallized and took concrete shape by the untiring efforts of Late Pt. S.N.M. Tripathi. The proposal was accepted in principle by the first Chief Minister of U.P., Late Pt. Govind Ballabh Pant, but it was only in 1956 that the University came into existence by an act passed by the U.P. Legislature. It actually started functioning since September 1, 1957, when the faculties of Arts, Commerce, Law and Education were started

Faculties[edit]

  • Faculty of Arts

उत्‍तर प्रदेश राज्‍य विश्‍वविद्यालय अधिनियम के अन्‍तर्गत 1956 ई0 में स्‍थापित गोरखपुर विश्‍वविद्यालय में कला संकाय को प्रथम संकाय होने का गौरव प्राप्‍त है। इसके प्रथम सत्र में अंग्रेजी, शिक्षाशास्‍त्र, मनोविज्ञान, संस्‍क़त एवं पुरातत्‍व विभाग में कक्षायें प्रारम्‍भ हुई। स्‍थापना से लेकर आजतक 50 वर्षो में संकाय ने उत्‍तरोत्‍तर विकास किया है। सम्‍प्रति इस संकाय में 13 विभाग हैं तथा इसके अन्‍तर्गत विश्‍वविद्यालय के सर्वाधिक छात्र अध्‍ययन हेतु अलग-अलग व्‍यवस्‍था है। छात्राओं की दीक्षा भवन में तथा छात्रों की कक्षायें कला संकाय भवन में चलती हैं। विद्यार्थियों को भारत के गौरवशाली अतीत से परिचित कराने के उद्देश्‍य से राष्‍टगौरव पाठ्रयक्रम वर्ष 2002 से प्रारम्‍भ किया गया है। स्‍नातक प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं के लिये इसकी कक्षायें प्रारम्‍भ कर कला संकाय इस क्षेत्र में प्रवर्तन भूमिका में आ गया और विश्‍वविद्यालय प्रदेश का राष्‍ट्रगौरव पाठयक्रम लागू करने वाला प्रथम विश्‍वविद्यालय बन गया। भविष्‍य के लिये संकाय की योजनायें अपने गौरवशाली अतीत को बनाये रखने तथा समय एवं अभिनव परिस्थितियों और चुनौतियों के अनुकूल अपने स्‍तर को बनाये रखने के लिये कला संकाय की निम्‍न भावी योजनायें हैं 1- उच्‍च शैक्षणिक वातावरण बनाने तथा विभिन्‍न विषयों की वर्तमान स्थिति तथा भावी प्रव़त्ति के ज्ञान हेतु प्रत्‍येक माह एक उच्‍चस्‍तरीय व्‍याख्‍यान कराना। 2- संकाय द्वारा अन्‍तरविषयक शोध पत्रिका के प्रकाशन की योजना है। 3- समसामयिक विषयों के बारे में शिक्षक एवं छात्रों के मध्‍य स्‍पष्‍टता हेतु तथा उनके मौलिक विचारों को दूसरे के समक्ष संप्रेक्षित होने के लिये तथा क्षेत्रीय, राष्‍ट्रीय एवं अन्‍तर्राष्‍ट्रीय घटनाओं एवं समस्‍याओं पर संगोष्ठियों के आयोजन की योजना है। इससे जहॉ एक ओर शिक्षकों के बौद्विक स्‍तर में अभिव़द्वि? होगी, वहीं दूसरी ओर अपने विचार को प्रभावी ढगं से प्रस्‍तुत करने की सिद्वता भी आयेगी। इन संगोष्ठियों से छात्र-छात्राओं में समाज के प्रति सकारात्‍मक एवं रचनात्‍मक प्रव़त्ति का निर्माण होगा। 4-भारतीय मान्‍यताओं, संस्‍कारों, राष्‍ट्रीय गौरव और स्‍थानीय कलाओं के प्रति जागय्‍कता पैदा करने तथा छात्र-छात्राओं में अन्‍तर्निहित सांस्‍क़तिक क्षमता के प्रस्‍ुटन हेतु उपयुक्‍त वातावरण प्रदान करने हेतु समय-समय पर सांस्‍क़तिक कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा, जिसमें छात्र-छात्रायें भाग लेकर अपनी सांस्‍क़तिक विरासत से परिचित हो सकेगें। 5-वर्तमान सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों के प्रति संकाय संवेदनशील है। इसका यक प्रयास होगा कि इन चुनौतियों को द़ष्टिगत कर पारस्‍परिक पाठ्रयक्रमों के साथ-साथ कुछ रोजगार एवं व्‍यवसायपरक पाठ्रयक्रम भी चलाया जायें।

  • Faculty of Science & Technology

व़र्ष 1957 में गोरखपुर विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना के पश्‍चात वर्ष 1958 में विज्ञान संकाय में पठन पाठन का कार्य आरम्‍भ हुआ। प्रारम्‍भ में इस संकाय के अन्‍तर्गत भौतिक विज्ञान, रसायनशास्‍त्र, वनस्‍पति विज्ञान, प्राणि विज्ञान तथा गणित विभाग में स्‍नातक तथा स्‍नातकोत्‍तर कक्षाएं एवं रक्षा अध्‍ययन विभाग में केवल स्‍नातक स्‍तर पर कक्षायें संचलित हुई। विज्ञान संकाय के अन्‍तर्गत भौतिक विज्ञान, इलेक्‍ट्रानिक्‍स विभाग, कम्‍प्‍यूटर विभाग, गणित एवं सांख्यिकी विभाग मजीठिया भवन में, प्राणि विज्ञान, रसायनशास्‍त्र एवं वनस्‍पति विज्ञान विभाग पन्‍त भवन में स्थित है। रक्षा अध्‍ययन विभाग, ग़ह विज्ञान विभाग एवं जैव प्रौद्वोगिकी विभाग के अपने भवन है। विज्ञान संकाय के अन्‍तर्गत विभाग - 1- रक्षा अध्‍ययन विभाग 2- रसायन विभाग 3- भौतिकी विभाग 4- इलेक्‍ट्रानिक्‍स विभग 5- कम्‍प्‍यूटर विज्ञान विभाग 6- गणित एवं सांख्यिकी विभाग 7- प्राणि विज्ञान विभाग 8- वनस्‍पति विज्ञान विभाग 9- जैव प्रौद्योगिकी विभाग 10- ग़हविज्ञान विभाग

  • Faculty of Commerce

गोरखपुर विश्‍वविद्यालय में शिक्षण कार्य आरम्‍भ होने के प्रथम वर्ष 1957 में ही वाणिज्‍य संकाय के अर्न्‍तगत एम0काम0 स्‍तर के प्रारम्‍भ होने से वाणिज्‍य संकाय द्विविभागीय संकाय हो गया। सन् 2001 को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् नयी दिल्‍ली द्वारा मान्‍यता प्राप्‍त एम0बी0ए0 पाठ्यक्रम को और अधिक सार्थक एवं गतिशील बनाने के लिए व्‍यवसायिक प्रशासन नामक प़थक विभाग की स्‍थापना हुई। वाणिज्‍य विभाग एवं व्‍यवसायिक प्रशासन विभाग महाराणा प्रताप परिसर में स्थ्‍ति हैं जब कि अर्थशास्‍त्र विभाग मुख्‍य परिसर में विद्यमान है। वाणिज्‍य संकाय के अन्‍तर्गत संचालित विभाग 1- वाणिज्‍य विभाग 2- अर्थशास्‍त्र विभाग 3- व्‍यवसाय प्रशासन विभाग

  • Faculty of Education

दीनदयाल उपाध्‍याय गोरखपुर विश्‍वविद्यालय, गोरखपुर में शिक्षा विभाग की स्‍थापना सन् 1953 में विश्‍वविद्यालय फाउन्‍डेशन सोसायटी' के संरक्षण में एल0टी0 कालेज के रुप में हुई। फरवरी सन् 1957 में 'विश्‍वविद्यालय फाउन्‍डेशन सोसायटी' द्वारा एल0टी0 कालेज की सम्‍पूर्ण परिसंपत्तियॉ एवं दायित्‍व त्तथा स्‍टाफ विश्‍वविद्यालय को हस्‍तां‍तरित कर दिया गया। इस प्रकार गोरखपुर विश्‍वविद्यालय में सर्वप्रथम 'शिक्षा विभाग' की स्‍थपना हुई जो जनवरी सन् 1979 में उत्‍तर प्रदेश शासन के निर्णय से एकल विभागीय 'शिक्षा संकाय में परिवर्तित हो गया। सन् 2003 में 'प्रौढ सतत एवं प्रसार शिक्षा विभाग' भी इसी संकाय का एक अंग बन गया। इस प्रकार वर्तमान समय से इस संकाय से दो विभाग - शिक्षाशास्‍त्र विभाग तथा प्रौढ सतत एवं प्रसार शिक्षा विभाग सम्‍बद्व हैं।वर्तमान समय में कुल 38 प्रशिक्षण महाविद्यालय दीनदयाल उपाध्‍याय गोरखपुर विश्‍वविद्यालय, गोरखपुर के शिक्ष संकाय के पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण में कार्यरत है, जिनमें 29 प्रशिक्षण महाविद्यालय शासन की स्‍ववित्‍तपोषित योजना के अन्‍तर्गत कार्यरत हैं।

  • Faculty of Law

विधि विभाग की स्‍थापना वर्ष 1958 में हुई। वर्तमान में निम्‍नलिखित महाविद्यालयों के विधि विभाग, गोरखपुर विश्‍वविद्यालय के विधि संकाय से सम्‍बद्व है - 1- सेण्‍ट एण्‍ड्रयूज कालेज, गोरखपुर 2- ए0पी0एन0 महाविद्यालय, बस्‍ती 3- सन्‍त विनोबा महाविद्यालय, देवरिया 4- ओरियण्‍टल लॉ इन्‍स्‍टीट्यूट, देवरिया 5- रैडिएन्‍ट लॉ कालेज, मानवेल, गोरखपुर विश्‍वविद्यालय के आवासीय खण्‍ड में स्थित विधि विभाग वर्तमान में 'बार काउंसिल ऑफ इण्डिया' द्वारा स्‍वीक़त विधि स्‍नातक कक्षा का त्रिवर्षीय पाठ्यक्रम विधि स्‍नातक शिक्षा के लिए सम्‍पूर्ण भारत में अनिवार्य किया जिसमें तीन वर्षो में 28 विषयों का अध्‍ययन करना है। सत्र 1973-1974 से एल-एल0बी0 एवं एल-एल0एम0 कक्षाओं में पूर्णकालिक छात्रों का ही प्रवेश किया जाता है। प्रत्‍येक छात्र को ट्यूटोरियल के साथ प्रतिदिन 4 घंटे की शिक्षा दी जाती है। विधि संकाय को अपना अलग पुस्‍तकालय है। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए समाज कल्‍याण विभाग द्वारा प़थक रुप में बुक बैंक योजना है।

  • Faculty of Agriculture

भारत एक कृषि प्रधान देश है। विगत पचास वर्षो से आर्थिक नियोजन से यद्यपि‍ कृषि में परिवर्तन हुये है तथापि भारत के आर्थिक सामाजिक और सांस्‍क़तिक जीवन में कृषि का महत्‍व बना हुआ है। राष्‍ट्रीय आय के उत्‍पादन, रोजगार, जीवन यापन के साधन, औद्यौगिक विकास, अन्‍तर्राष्टिय व्‍यापार आदि सभी पहलुओं से कृषि भारत का सबसे महत्‍वपूर्ण व्‍यवसाय है। नयी सहस्‍त्राब्‍दी में कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान की महत्‍ता वैश्‍वीकरण की दृष्टि से उत्‍तरोत्‍तर बढने लगी है और समस्‍त विश्‍व एक वैश्विक गॉव (ग्‍लोबल विलेज) का स्‍वरुप ग्रहण करने के लिये संकल्पित है। इस दिशा में कृषि एवं प्रौद्यौगिक विश्‍वविद्यालयों, अनुसन्‍धान संस्‍थानों तथ कृषि शिक्षण संस्‍थानों को ऐसी भूमिका सुनिश्‍चत करनी है कि हमारा देश वैश्‍वीकरण की धारा से निरन्‍तर जुडा रहे। प्रारम्‍भ में गोरखपुर विश्‍वविद्यालय में कृ‍षि संकाय की स्‍थापना कतिपय कारणों से नहीं हो सकी, किन्‍तु विभिन्‍न जनपदों के सम्‍बद्व महाविद्यालयों में स्‍नातक कृषि एवं कुछ महाविद्यालयों में स्‍नातकोत्‍तर कृषि विषयों में पठन-पाठन चलता रहा। इसके साथ ही कुछ कृषि महाविद्यालयों में अनुसंधान की दिशा में भी गम्‍भीर प्रयास किये गये। वर्तमान में मात्र तीन महाविद्यालय, नेशनल स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय बडहलगंज, बाबा राघव दास स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय, देवरिया तथा चौधरी चरण सिंह महाविद्यालय, पदमापुर, पांडवनगर, बस्‍ती ही इस विश्‍वविद्यालय के कृषि संकाय हैं।

Research areas[edit]

Department of Physics[edit]

Department of Physics, Majithiya Block

In the beginning, research facilities in the field of molecular spectroscopy and the luminescence were developed and a number beginning in the field of semiconductor devices, polymer studies and theoretical studies in the field of exact solutions of Einstein field equations were also carried out. With growing numbers of teaching staff, studies in the field of crystal structure using X-ray techniques, investigations in the field of liquid crystals and biomolecules, experimental studies in solar physics and categorization of stars, studies of stellar matter particularly black holes and galactic clusters were undertaken. A strong in the field of supersonic conductors, dielectric polarization, absorption and dispersion studies and rare earth oxides were developed in the mid 1970s. Studies in the field of thin-film solar energy conversion devices, organic semiconductors and currently multilayer and nanostructure materials and devices have been developed.

A group in biophysics is studying transcription in DNA molecules and junction of these molecules. This group is also carrying out conformal mapping of biomolecules using X-ray techniques and NMR investigations. Another group in the field of Particle Physics is also active and is engaged in collaborative programme with CERN, Germany. Most of the faculty members after having their training in the country have worked in renowned research laboratories and centres of theoretical studies abroad.

Department of Mathematics & Statistics[edit]

As of 2011 Remy Denis, president of the All India Catholic Union, was a professor in the Department of Mathematics.[1] Research is being done in the fields of Theory of Relativity, Differential Geometry, Fluid Dynamics, Special Functions, Summability Theory, Functional Analysis, Differentiable Manifolds, Number Theory, and Graph Theory and in Statistics, Bayesian inference, Life Testing, Reliability Theory Demography, etc. The Department of Mathematics and Statistics has made great strides.

Department of Chemistry[edit]

Department of Chemistry (Pant Bhavan)

The Department of Chemistry was established in 1958 with late Prof. S.C. Tripathi as its founder member and Prof. Mehrotra (April 1958 to July 1962) as its first head.

Prof. R.P.Rastogi was appointed Professor & Head of the Chemistry Department in August 1962. He continued to be its Head until 1985, when he was appointed Vice - Chancellor, Banaras Hindu University, Varanasi. Under Prof. Rastogi, Department saw tremendous growth in chemical research and education activity and earned international fame in various areas including: Solid State Processes and Rocket Propulsion, Thermodynamics of Mixtures, Thermodynamics of Irreversible Processes, Non-linear Dynamics just to name a few. Chemistry Department is still very active in chemical research and education to continue its tradition.

Graduates from Chemistry Department are traditionally well respected and serving nationally and internationally at various top and responsible positions.

Hostels[edit]

  • Sant Kabir Hostel
  • Gautam Buddha Hostel
  • Vivekanand Hostel
  • Nath Chandravat Hostel
  • Rani Lakshmi Bai Mahila Hostel

Notable alumni[edit]

See also[edit]

References[edit]

  1. ^ "All India Catholic Union ANNUAL REPORT FOR THE YEAR ENDED 31st MARCH, 2011". AICU. 24 September 2011. p. 4. Retrieved 2012-04-16. 

External links[edit]